दिमाग में डिप्रेशन कैसे काम करता है?HealthPlanet

Posted on Tue 13th Dec 2022 : 10:49

असफलता, संघर्ष और किसी अपने से बिछड़ जाने के कारण दुखी होना बहुत ही आम और सामान्य है। परन्तु अगर अप्रसन्नता, दुःख, लाचारी, निराशा जैसी भावनायें कुछ दिनों से लेकर कुछ महीनों तक बनी रहती है और व्यक्ति को सामान्य रूप से अपनी दिनचर्या जारी रखने में भी असमर्थ बना देती है तब यह डिप्रेशन नामक मानसिक रोग का संकेत हो सकता है।

ये major depressive disorder के तहत आता है जो कि आम लेकिन सीरियस मेडिकल जरूरत है. अवसाद में हमारे सोचने और काम करने के तरीके पर असर पड़ता है. कम से कम दो हफ्ते तक लगातार सिर्फ नकारात्मक सोच रहे, नींद और खाने का तरीका बदल जाए, हरदम थकान रहे, शौक खत्म हो जाए तो ये सारे लक्षण डिप्रेशन के तहत आते हैं. हालांकि कई दूसरी बीमारियों के लक्षण डिप्रेशन से मिलते-जुलते हैं जैसे कि थायरॉइड, ब्रेन ट्यूमर और विटामिन डी की कमी. ऐसे में डिप्रेशन के नतीजे पर पहुंचने से पहले डॉक्टर दूसरी जांचें भी करवाते हैं.

वैसे तो डिप्रेशन किसी को भी हो सकता है लेकिन कुछ खास लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है. जैसे मस्तिष्क में कुछ खास केमिकल्स में बदलाव से अवसाद होता है. इसकी वजह से दिमाग के 3 हिस्सों- हिप्पोकैंपस, एमीग्डेला और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पर असर होता है. ये तीनों ही हिस्से काफी अहम हैं और याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता और भावनाओं पर कंट्रोल रखते हैं. इनपर असर पड़ने पर इंसान का नॉर्मल व्यवहार बदल जाता है. डिप्रेशन के पीछे कोई आनुवांशिक वजह भी हो सकती है. इसके तहत कुछ लोग जब चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहे होते हैं तो उनके अवसाद में जाने की आशंका अधिक रहती है. इनके अलावा हिंसा, बचपन के बुरे अनुभव, गरीबी और कमजोर आत्मविश्वास भी डिप्रेशन की वजह हो सकता है.

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